Connect with us

religion

समन्वय स्थापित करने का संदेश देता है करमा का त्‍योहार

Published

on

समन्वय स्थापित करने का संदेश देता है करमा का त्‍योहार

करमा को झारखंड का बड़ा लोकपर्व कहा जा सकता है। इसकी एक वजह यह है कि इस पर्व को आदिवासी और मूलवासी (सदान) दोनों ही वर्ग श्रद्धा और उल्लास से मनाते हैं। दूसरी वजह इसका विस्तार है। डॉ रामदयाल मुंडा और रतन सिंह मानकी की पुस्तक आदि धरम में जिक्र है कि इसका विस्तार पूर्व में असम से लेकर पश्चिम में राजस्थान तक और उत्तर में नेपाल से लेकर दक्षिण में छत्तीसगढ़ तक है। यानी इन क्षेत्रों में किसी न किसी रूप में करमा पर्व को लोग मनाते हैं। यह भी प्रकृति से जुड़ा पर्व है।

सरहुल में अच्छी बारिश के लिए पूजा की जाती है। वहीं करमा में बीज अच्छी तरह अंकुरित हो, उनमें कीड़े न लगें और अच्छी फसल हो, इसके लिए पूजा की जाती है। करमा पर्व भाई-बहन के स्नेह का भी पर्व है। बहनें अपने भाइयों की सुख समृद्धि के लिए करमा देव की पूजा करती हैं। यह पर्व कर्म और धर्म के बीच में समन्वय स्थापित कर चलने का संदेश देता है।

कुछ दशक पहले तक करमा पर्व सादगी से मनाया जाता था, पर पिछले कुछ वर्षों में करमा पर्व धूमधाम और रौनक के साथ मनाया जाने लगा है। विभिन्न सरना समिति और मोहल्लों में होनेवाली पूजा के दौरान पूजा स्थल की सजावट में क्रिएटिविटी भी देखने को मिल रही है।

पूजा स्थलों के आसपास विद्युत साज-सज्जा की जाती है। पूजा स्थल के पास आकर्षक गेट बनाये जाने लगे हैं। पूजा स्थल को फूलों, पत्तियों, रंगीन झंडियों, बैलून आदि चीजों से सजाया जाने लगा है। कई पूजा समितियां करमा के अवसर पर पूजा स्थल के पास आकर्षक कलाकृतियां बनाती हैं। हालांकि पर्व के मूल अर्थात पूजन पद्धति में कोई बदलाव नहीं आया है। यह पूरी तरह से पारंपरिक तरीके और रीति-रिवाजों के साथ ही मनायी जाती है। पूजा करने वाले युवा करमा डाल को खुद काट कर लाते हैं, पर आजकल बाजारों में भी करमा की डाली बिकने लगी है।

पूरा विश्व ईश्वर का रूप है करमा पर्व के आदि से अंत के नियम की ओर अगर हम गौर करें, तो ये नियम सर्वशक्तिमान भगवान की ही याद दिलाते हैं। यह पर्व कर्म ज्ञान को मानव समाज में युग युगांतर तक अटूट रखने का भी स्मरण कराता है। इस पर्व में प्रतीक स्वरूप एक डाला होता है़। उपासकों द्वारा उस पर पवित्रता के साथ नौ तरह के अनाज के बीजों को मिट्टी बालू देकर बोया जाता है। उन बीजों को सूर्य देव को अर्पित कर देने का नियम है। सूर्य के साथ पवन, आकाश, पानी औ मिट्टी को पंचभूत के रूप में अर्पित करने का नियम प्रकृति रूपी ईश्वर की याद दिलाता है। इस प्रकृति रूपी ईश्वर को जानने के लिए तसवीर, प्रतिमा, नाम, मंदिर की जरूरत नहीं पड़ती। इस नियम के द्वारा यही समझा जाता है कि सीधा प्रकृति का जो रूप हमें देखने को मिलता है, वही ईश्वर का सही रूप है। यह पर्व हमें यह भी  याद दिलाता है कि पूरा विश्व ईश्वर का रूप है।

Continue Reading
Advertisement
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

religion

साल में कितने नवरात्र एक दो या पांच, जानिए नवरात्र उपासना का महत्‍व

Published

on

साल में कितने नवरात्र एक दो या पांच, जानिए नवरात्र उपासना का महत्‍व

नवरात्र का पावन महीने साल में दो बार आता है। सीधा सीधा कहें तो एक बार मार्च-अप्रैल महीने में, दूसरी बार सितंबर-अक्टूबर महीने में… नवरात्र के 9 दिनों में हम मां दुर्गा के 9 रूपों की अराधना करते हैं। घरों में कलश की स्थापना होती है। अखंड ज्योत जलती है। मांस-मदिरा से परहेज किया जाता है। यही नहीं, प्याज लहसुन का इस्तेमाल भोजन के लिए नहीं किया जाता है।

जो लोग साल में दो बार नवरात्र होने के सवाल का जवाब चाहते हैं, उन्हें ये जानकर और भी हैरानी होगी कि नवरात्र पांच बार होते हैं जिन्हें हम गुप्त नवरात्र के नाम से भी जानते हैं। हांलाकि इन्हें मानते बहुत कम लोग हैं। ज्यादातर लोग दो ही नवरात्र मानते हैं। एक नवरात्रि गर्मी की शुरुआत पर चैत्र माह में और दूसरा शीत की शुरुआत पर आश्विन माह में पड़ता है।

गर्मी और सर्दी के मौसम में जो ऊर्जा हमें सबसे अधिक प्रभावित करती है, वो सौर-ऊर्जा है। फसल पक जाने के बाद कई शुभ कार्य किए जाते हैं। ये दोनों माह ऐसे हैं जब मौसम बेहद अनुकूल होता है। यही वजह है कि पवित्र शक्तियों की आराधना करने के लिए यह समय सबसे अच्छा माना जाता है। प्रकृति में बदलाव के कारण हमारा अंतर्मन भी बदलावों के दौर से गुजरता है। यही वजह है कि शारीरिक और मानसिक संतुलन बनाए रखने के लिए इस दौरान उपवास रखकर देवी की उपासना की जाती है। एक बार इसे सत्य और धर्म की जीत के रूप में मनाते हैं जबकि दूसरी बार भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव के रूप में।

दोनों नवरात्र हमेशा मौसम के बदलने के साथ ही मनाए जाते हैं। गर्मियों में आने वाले नवरात्र में मौसम सर्दी से गर्मी की तरफ बढ़ रहा होता है और इसी दौरान हमारे शरीर में भी ढेर सारे बदलाव होते हैं। इन बदलावों को शरीर पर नकारात्मक प्रभाव न पड़े इसलिए हम मां दुर्गा के 9 रूपों की अराधना करते हैं। चूंकि हिंदू धर्म के सभी रीति रिवाज और मान्यताएं वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर केंद्रित हैं इसलिए इस दौरान भी दिन और रात बराबर होते हैं। मार्च-अप्रैल और सितंबर-अक्टूबर के बीच, दिन और रात की अवधि लगभग एक जैसी यानी बराबर होती है। यही कारण है कि नवरात्र इस वक्त मनाए जाते हैं।

हिंदू पौराणिक कथाओं में उल्लेख है कि भगवान श्रीराम ने लंका पर विजय प्राप्त करने के लिए मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की थी इसीलिए सर्दी के वक्त मनाये जाने वाले नवरात्र को हम रामनवमी के नाम से भी जानते हैं।

Continue Reading

religion

महालया, दुर्गा पूजा और नवरात्र 2017 का शुभ मुहूर्त जानिये पंडित रामदेव पांडेय से 

Published

on

महालया, दुर्गापूजा और नवरात्र 2017 का शुभ मुहूर्त जानिये पंडित रामदेव पांडेय से 

रांची। बीस साल बाद ऐसा संयोग कि महालया के एक दिन बाद कलशस्थापन होगा,  मंगलवार को अमावस दिन 11:55 से है जो बुधवार दोपहर 10:22 तक होगा,  इसलिए अमावस श्राद्ध मंगलवार को ही समाप्त हो जायेगा, पं रामदेव पाण्डेय के अनुसार श्राद्ध मध्याहन काल मे होता है, उदय सूर्योदय के तिथि का मान श्राद्ध में नहीं लिया जाता है, बुधवार को केवल स्नान-दान का काम होगा, इस दिन लोग अपनी नानी के लिऐ सिर्फ श्राद्ध दान कर सकते है,  गुरूवार को शारदीय नवरात्र का कलश स्थापन होगा, इस दिन प्रतिपदा सुबह 9:59 मिनट तक है, इसके बाद द्वितीया होता है परन्तु हस्ता नक्षत्र रात 12:09 तक और शुक्ल योग दिन 11:09 तक होने से कलशस्थापन  दिन भर किया जा सकता है।

क्या है महालया

नवरात्र के शुरू होने के पूर्व दिन को महालया होता है, इसलिए पितृ पक्ष का विसर्जन होता है, बिहार-बंगाल में महालया के दिन से दुर्गा सप्तशती (चण्डीपाठ) के मूल श्लोक का पाठ शुरू भी होता है, परन्तु कलश स्थापना गुरूवार से होगा।

दुर्गा पूजा, नवरात्र 2017  – कलश स्थापना की शुभ मुहूर्त :- 21 सितंबर  2017 –  गुरूवार

आगमण- डोला -फल अशुभ

ब्रह्म मुहूर्त – सुबह – 3 :00 से 10 :00  तक , पूरा दिन

शुभ  चोघडिया –

सभी के लिए-    शुभ  –     सुबह    से      7:46 – तक

व्यापारियो के लिए-  लाभ –   12:20 से 1:52   -तक

कारपोरेट के लिऐ -अमृत –    1:52   से  3:23      -तक

साधको के लिए  – काल  –  शाम-   3:23  से 4:55   – तक

सर्वजन के लिऐ – शुभ  – शाम   4:55   से  6:24     -तक

अभिजित  मुहूर्त- दोपहर -11:36 से 12 :24

नोट : प्रतिपदा    गुरूवार  सुबह  -10:00 तक,  हस्ता नक्षत्र गुरू वार रात 12: 11 तक है ,शुक्ल  योग  दिन  11 :02  तक है।

कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त प्रात: 3: 00 से 6 : 15 बजे तक

अमृत – सुबह 6:00 से 8 :24 तक

प्रथम बेला  :- 8:24 से 10:15 तक

अभिजित – दोपहर -11:36 से 12:24 तक

।। पूजा पण्डालो की नवरात्र पूजन कार्यक्रम ।।

शारदीय नवरात्रि 2017  – कार्यक्रम 10 दिन का नवरात्रि है।

21 सितंबर  – गुरूवार –

प्रतिपदा – कलश स्थापना- सुबह 6:30,  ध्वजारोपन, दिन भर, – शैल पुत्री पूजन, सुबह आरती – 9 :00 //  शाम आरती 8 :00 ( महाराजा अग्रसेन जयन्ती)

22 सितंबर शुक्रवार  – द्वितीया

( ब्रह्म चारिणी पूजन )- मुहर्रम 1-1439 शुरू

23 सितंबर  शनिवार – तृतीया  –

( सुबह 19 :50 तक )चन्द्रघन्टा पूजन

। सुबह आरती – 9 :00 //  शाम आरती 8 :00

24 सितंबर रविवार- – चतुर्थी

(दिन 011:46 तक )

कुष्माण्डा पूजन

सुबह आरती – 9 :00 //  शाम आरती 8:00

25 सितम्बर- सोमवार  – पँचमी –

( दिन 01:30  तक)

कात्यायनी पूजन।

26 सितंबर मगलवार – महाषष्ठी-

(  दिन 03:20 तक  ,कालरात्रि पूजन ।-

सुबह आरती  दिन 09:00,।शाम आरती 8:00

बेलवरण शाम – 5:50 बजे से

आगमन-  घोडा पर – अशुभ फल

27 सितंबर बुधवार  – महासप्तमी

(शाम  5 :26 तक)

ज्येष्ठा  दिन – 09 :42 तक

नवपत्रिका प्रवेश सुबह – 7 :00 से

सभी प्रतिमा का प्राण प्रतिष्ठा होगी

,आरती *पुष्पाजलि शाम 12 :00 /  शाम आरती 8:00 ।

सांस्कृतिक कार्यक्रम-

28 सितम्बर गुरुवार – महाअष्टमी – 

(रात -07 :26  तक)

महाअष्टमी पूजा  -सन्धिपूजा  बलि – शाम – 7 :26 मे

(मूल- दिन -12:17 तक)

दोपहर –  आरती- पुष्पाँजलि – दोपहर- 11:00   , शाम आरती पुष्पाजलि – 8:00

सांस्कृतिक कार्यक्रम-

29 सितंबर शुक्रवार  – महानवमी- 

 

( रात  -9 :23 तक ,  पूर्षाषाढ दिन 2:47 तक)

सिद्धिदात्री पूजन।

नवमी पूजन , हवन 12:03 बजे दोपहर

आरती *पुष्पाजलि

शाम – 8:00 ।। महाभोग वितरण- दोपहर 2 :00 बजे

साँस्कृतिक कार्यक्रम रात-

30 सितम्बर शनिवार  – विजया दशमी

विजयादशमी -( रात  11:00  तक)

उतराषाढ-  शाम  -05: 0 3 तक )

विसर्जन-हवन – 10:00 से 11:30 तक

पुष्पाजँलि  आरती – सुबह – 11:40

नवरात्रि का पारण । विसर्जन

देवी प्रस्थान – पैदल पाँव – फल  विकल

नवरात्र बिशेष नव देवियो कें नाम उनकें प्रतिदिन कें भोग और तिथियो की पूरी जानकारी, इस नवरात्र में तिथिया बढ़ रही है जो की शास्त्रो कें हिसाब सें शुभ है माता का आना भी शुभ संकेत है। श्रध्दाभाव एवं विश्‍वास सें माँ की सेवा करें आप की हर मनोकामना पूरी होगी।

(1) प्रथम – कलशस्थापन  -शैलपुत्री (भोग -खीर)

(2) द्वितीया- ब्राह्मचारिणी (भोग-खीर,गाय का घी,एवं मिश्री)

(3) त्रतीया-चन्द्रघंटा (भोग-कैला,दूध,माखन,मिश्री )

(4) चतुर्थी-कुष्मांडा (भोग-पोहा,नारियल,मखाना)

(5) पंचमी-स्कन्दमाता (भोग-शहद एवं मालपुआ )खिलोना

(6) षष्टी-कात्यायनी(भोग- शहद एवं खजूर)) सुहाग सामान

(7) सप्तमी-कालरात्री (भोग-अंकुरीत चना एवं अंकुरित मूँग )

(8) अष्टमी-महागौरी (भोग-नारियल,खिचड़ी,खीर )

(9) नवमी -सिध्दीदात्री (भोग-चूड़ा दही,पेड़ा,हलवा,,)

(10 ) दशमी – धान का लावा

Pandit Ramdeo pandey (astrologer Ramdeo pandey ) – Ranchi_ India_ whatsapp 0 8877003232

Continue Reading

India

देश के हाई प्रोफाइल मोस्‍ट वांटेड ढोंगी बाबा, इनके खिलाफ दर्ज हैं कई संगीन मामले

Published

on

देश के हाई प्रोफाइल मोस्‍ट वांटेड ढोंगी बाबा, इनके खिलाफ दर्ज हैं कई संगीन मामले
Prev1 of 11
Use your ← → (arrow) keys to browse

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने 14 नकली बाबाओं की लिस्ट जारी की है। इसमें आसाराम उर्फ आशुमल शिरमानी, सुखविंदर कौर उर्फ राधे मां, सचिदानंद गिरी उर्फ सचिन दत्ता, गुरमीत राम रहीम डेरा सच्चा सिरसा, ओम बाबा उर्फ विवेकानंद झा, निर्मल बाबा उर्फ निर्मलजीत सिंह, इच्छाधारी भीमानंद उर्फ शिवमूर्ति द्विवेदी, स्वामी असीमानंद, ऊं नम: शिवाय बाबा, नारायण साईं, रामपाल, खुशी मुनि, बृहस्पति गिरि और मलकान गिरि समेत कुल 14 नाम शामिल हैं। इनमें से किसी पर मर्डर का आरोप है, तो कोई रेप का दोषी है। लेकिन ये अपने श्रद्धालुओं के बीच काफी प्रसिद्ध रहे हैं। फिर चाहे वो गुरमीत राम रहीम हों या आसाराम।

14 नकली बाबाओं की लिस्ट

आसाराम: आसाराम ने अपने धर्म की दुकान गुजरात के अहमदाबाद से शुरू की। धर्म का सहारा लेकर इन्होंने अरबों का साम्राज्य खड़ा किया है। साल 2013 से ये नाबालिग शिष्या से रेप के आरोप में जेल में बंद हैं।

इनपर आरोप है कि ये आशीर्वाद देने के नाम पर नाबालिग लड़कियों का यौन शोषण और बलात्कार करते थे। हालांकि अब तक इनपर आरोप सिद्ध नहीं हो पाया है।

Prev1 of 11
Use your ← → (arrow) keys to browse

Continue Reading
Advertisement

Polls

Online Shopping में Best Deal किसका ?

View Results

Loading ... Loading ...

Facebook

Advertisement

Trending