Connect with us

religion

करमा त्‍योहार है भाई बहनों के प्रेम और हरियाली का प्रतीक

Published

on

करमा त्‍योहार है भाई बहनों के प्रेम और हरियाली का प्रतीक

–  गिरिधारी राम गोंझू

भादो का महीना लग गया। आंगन में भादो कर कादो भर गया। ये कादो तो तभी जमेगा, जब आंगन में करम का अंगइन झूमर खेला जायेगा। चारों ओर हरियाली का समंदर लहरा रहा है। गोंदली गोड्डा पक गये हैं। मड़ुआ गदरा रहा है। नदी-नाले भर गये हैं।

अखरा में जोड़ा मांदर बजने लगा है। बहन ससुराल में अकबका रही है। पिछले साल ही उसका विवाह हुआ है। करम पहुंच गया है। मायके में नवविवाहिता पहुंच कर सखी-सहेलियों, छोटी-बड़ी बहनों और अपनी करम डाइर से मिलने, झूमर खेलने को व्याकुल हो रही है। कहीं कोइल नदी तो भर नहीं गयी, जिससे भाई न आ पा रहा हो? एको गो मोर बहिन कोइल पार दिया लोक।।।।

भाई करम के अवसर पर बहन को लाने कैसे न जाये। भरी कोयल नदी पार कर भाई पहुंचता है। बहन के लिए नीले रंग की साड़ी ले जाता है। करम के लिए बहन को उसकी ससुराल से विदा करा लाता है। मायके पहुंचते ही उसकी करम डाइर (सहेली विशेष) सखी सहेली और बहनें जमा हो जाती हैं। करम की योजना बनाती है। भादो का एकादशी शुक्ल पक्ष को करम का त्योहार है। भाई-बहन के स्नेह का त्योहार है। भाई के लिए बहन करम करने आयी है। भाई की सुख समृद्धि के लिए पूजा करने आयी है। सात दिन बच गये हैं। जावा उठाना है। नयी टोकरी, नदी का नया बालू, सात प्रकार के अन्न (धान, गेंहू, जौ, उड़द, मकई, उरद, कुलथी) तैयार है।

गांव भर की बहनें उपवास  कर नदी नहाने जाती हैं। नयी टोकरी में नदी का स्वच्छ महीन बालू भर लाती हैं। घर व आंगन को लीप पोत कर उसके मध्य पीढ़ा सजाती है। उस पर बालू भरी टोकरी स्थापित करती हैं। सातों प्रकार के अन्न के दानों को बालू में मिला कर हल्दी पानी से सींचा जाता है। चारों ओर बहनें गोलाकार जुड़ कर जावा जगाने का गीत गाती व नृत्य करती है। जावा मोय जगालो किया किया जावा।।। सात दिन इसी तरह प्रात: संध्या बहनें मिल कर जावा जगाती हैं। सातों दिन बहनें शुद्ध सादा भोजन करती हैं।

आज एकादशी है। पर्व करने वाली सभी पार्वतीन बहनें जावा देखती हैं। वे सोने से पीले चमकदार उग आये हैं। साग, मांस मछली, तेल, घी सबका जो पूर्ण/परहेज कर रखी थी। संध्या के समय गांव की सभी बहनें नदी स्नान करने जाती हैं। घर आकर नयी साड़ी और पूर्ण आभूषणों से अपने को सजाती है। गांव के कुछ भाई लोग दिन भर उपवास रख जंगल से करम की तीन डालियां काटने जाते हैं। एक भाई करम की खूबसूरत डाली एक वार से काटता है। नीचे का भाई उसे लोकता है। इसके बाद बड़े आदर सत्कार के साथ उसे घर आंगन लाया जाता है।

आंगन में सभी बहनें करम झूर (डाली) के चारों अोर पूजन सामग्री के साथ बैठ गयी हैं। गांव का बूढ़ा पाहन करम की कथा सुनाता जाता है। कथा की समाप्ति के साथ पूजा समाप्त होती है।

पार्वतीन बहनें फलाहार कर करम झूर के चारों ओर अंगनई झूमर का समां बांध देती हैं। सुरीले मधुर गूंजने लगते हैं अौर भाइयों का दल मांदर लेकर आंगन में उतर जाता है। मांदर धींग धातुंग तांग तांग की लय ताल पर गुंजायमान होने लगता है। भादो कर एकादशी करम गड़ालों सखी।।। गीत गूंजने लगते हैं।

जावा डलिया को पुष्पहार से अदभुत सजा दिया जाता है। रात भर करम गीत, नृत्य व संगीत से पूरा गांव मधुर संगीत से झूमता रहता है। गांव के अखरा का तो कहना ही नहीं, जैसे घर का अंगना, वैसे गांव का अखरा। मांदर के साथ हेचका, करताल, घुंघरू बजते हैं। रात की हर बेला में अलग-अलग रात में गीत गूंजते हैं। सुबह होती है़ करम राजा, करम गोसाई, करम देव को अब विदा करना है। जावा पूजा के बाद बंट चुका है। महिलाएं अपने जूड़े पर पुरुष अपने कानों पर जावा सजा चुके हैं।

बचे हुए जावा डाली और करम डालियों को उपवासी बहनें उखाड़ लाती हैं। उसे द्वार-द्वार ले जाकर नाचती गाती करम देव को विदाई देती हैं।

आइझ तो रे करम राजा घरे दुवारे काइल तो रे करम राजा कास नदी तीरे।। और करम गोसांई को नदी में जावा डाली के साथ विसर्जित कर दिया जाता है।

लेखक जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग (रांची विश्‍वविद्यालय) के पूर्व विभागाध्यक्ष हैं

Continue Reading
Advertisement
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

religion

साल में कितने नवरात्र एक दो या पांच, जानिए नवरात्र उपासना का महत्‍व

Published

on

साल में कितने नवरात्र एक दो या पांच, जानिए नवरात्र उपासना का महत्‍व

नवरात्र का पावन महीने साल में दो बार आता है। सीधा सीधा कहें तो एक बार मार्च-अप्रैल महीने में, दूसरी बार सितंबर-अक्टूबर महीने में… नवरात्र के 9 दिनों में हम मां दुर्गा के 9 रूपों की अराधना करते हैं। घरों में कलश की स्थापना होती है। अखंड ज्योत जलती है। मांस-मदिरा से परहेज किया जाता है। यही नहीं, प्याज लहसुन का इस्तेमाल भोजन के लिए नहीं किया जाता है।

जो लोग साल में दो बार नवरात्र होने के सवाल का जवाब चाहते हैं, उन्हें ये जानकर और भी हैरानी होगी कि नवरात्र पांच बार होते हैं जिन्हें हम गुप्त नवरात्र के नाम से भी जानते हैं। हांलाकि इन्हें मानते बहुत कम लोग हैं। ज्यादातर लोग दो ही नवरात्र मानते हैं। एक नवरात्रि गर्मी की शुरुआत पर चैत्र माह में और दूसरा शीत की शुरुआत पर आश्विन माह में पड़ता है।

गर्मी और सर्दी के मौसम में जो ऊर्जा हमें सबसे अधिक प्रभावित करती है, वो सौर-ऊर्जा है। फसल पक जाने के बाद कई शुभ कार्य किए जाते हैं। ये दोनों माह ऐसे हैं जब मौसम बेहद अनुकूल होता है। यही वजह है कि पवित्र शक्तियों की आराधना करने के लिए यह समय सबसे अच्छा माना जाता है। प्रकृति में बदलाव के कारण हमारा अंतर्मन भी बदलावों के दौर से गुजरता है। यही वजह है कि शारीरिक और मानसिक संतुलन बनाए रखने के लिए इस दौरान उपवास रखकर देवी की उपासना की जाती है। एक बार इसे सत्य और धर्म की जीत के रूप में मनाते हैं जबकि दूसरी बार भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव के रूप में।

दोनों नवरात्र हमेशा मौसम के बदलने के साथ ही मनाए जाते हैं। गर्मियों में आने वाले नवरात्र में मौसम सर्दी से गर्मी की तरफ बढ़ रहा होता है और इसी दौरान हमारे शरीर में भी ढेर सारे बदलाव होते हैं। इन बदलावों को शरीर पर नकारात्मक प्रभाव न पड़े इसलिए हम मां दुर्गा के 9 रूपों की अराधना करते हैं। चूंकि हिंदू धर्म के सभी रीति रिवाज और मान्यताएं वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर केंद्रित हैं इसलिए इस दौरान भी दिन और रात बराबर होते हैं। मार्च-अप्रैल और सितंबर-अक्टूबर के बीच, दिन और रात की अवधि लगभग एक जैसी यानी बराबर होती है। यही कारण है कि नवरात्र इस वक्त मनाए जाते हैं।

हिंदू पौराणिक कथाओं में उल्लेख है कि भगवान श्रीराम ने लंका पर विजय प्राप्त करने के लिए मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की थी इसीलिए सर्दी के वक्त मनाये जाने वाले नवरात्र को हम रामनवमी के नाम से भी जानते हैं।

Continue Reading

religion

महालया, दुर्गा पूजा और नवरात्र 2017 का शुभ मुहूर्त जानिये पंडित रामदेव पांडेय से 

Published

on

महालया, दुर्गापूजा और नवरात्र 2017 का शुभ मुहूर्त जानिये पंडित रामदेव पांडेय से 

रांची। बीस साल बाद ऐसा संयोग कि महालया के एक दिन बाद कलशस्थापन होगा,  मंगलवार को अमावस दिन 11:55 से है जो बुधवार दोपहर 10:22 तक होगा,  इसलिए अमावस श्राद्ध मंगलवार को ही समाप्त हो जायेगा, पं रामदेव पाण्डेय के अनुसार श्राद्ध मध्याहन काल मे होता है, उदय सूर्योदय के तिथि का मान श्राद्ध में नहीं लिया जाता है, बुधवार को केवल स्नान-दान का काम होगा, इस दिन लोग अपनी नानी के लिऐ सिर्फ श्राद्ध दान कर सकते है,  गुरूवार को शारदीय नवरात्र का कलश स्थापन होगा, इस दिन प्रतिपदा सुबह 9:59 मिनट तक है, इसके बाद द्वितीया होता है परन्तु हस्ता नक्षत्र रात 12:09 तक और शुक्ल योग दिन 11:09 तक होने से कलशस्थापन  दिन भर किया जा सकता है।

क्या है महालया

नवरात्र के शुरू होने के पूर्व दिन को महालया होता है, इसलिए पितृ पक्ष का विसर्जन होता है, बिहार-बंगाल में महालया के दिन से दुर्गा सप्तशती (चण्डीपाठ) के मूल श्लोक का पाठ शुरू भी होता है, परन्तु कलश स्थापना गुरूवार से होगा।

दुर्गा पूजा, नवरात्र 2017  – कलश स्थापना की शुभ मुहूर्त :- 21 सितंबर  2017 –  गुरूवार

आगमण- डोला -फल अशुभ

ब्रह्म मुहूर्त – सुबह – 3 :00 से 10 :00  तक , पूरा दिन

शुभ  चोघडिया –

सभी के लिए-    शुभ  –     सुबह    से      7:46 – तक

व्यापारियो के लिए-  लाभ –   12:20 से 1:52   -तक

कारपोरेट के लिऐ -अमृत –    1:52   से  3:23      -तक

साधको के लिए  – काल  –  शाम-   3:23  से 4:55   – तक

सर्वजन के लिऐ – शुभ  – शाम   4:55   से  6:24     -तक

अभिजित  मुहूर्त- दोपहर -11:36 से 12 :24

नोट : प्रतिपदा    गुरूवार  सुबह  -10:00 तक,  हस्ता नक्षत्र गुरू वार रात 12: 11 तक है ,शुक्ल  योग  दिन  11 :02  तक है।

कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त प्रात: 3: 00 से 6 : 15 बजे तक

अमृत – सुबह 6:00 से 8 :24 तक

प्रथम बेला  :- 8:24 से 10:15 तक

अभिजित – दोपहर -11:36 से 12:24 तक

।। पूजा पण्डालो की नवरात्र पूजन कार्यक्रम ।।

शारदीय नवरात्रि 2017  – कार्यक्रम 10 दिन का नवरात्रि है।

21 सितंबर  – गुरूवार –

प्रतिपदा – कलश स्थापना- सुबह 6:30,  ध्वजारोपन, दिन भर, – शैल पुत्री पूजन, सुबह आरती – 9 :00 //  शाम आरती 8 :00 ( महाराजा अग्रसेन जयन्ती)

22 सितंबर शुक्रवार  – द्वितीया

( ब्रह्म चारिणी पूजन )- मुहर्रम 1-1439 शुरू

23 सितंबर  शनिवार – तृतीया  –

( सुबह 19 :50 तक )चन्द्रघन्टा पूजन

। सुबह आरती – 9 :00 //  शाम आरती 8 :00

24 सितंबर रविवार- – चतुर्थी

(दिन 011:46 तक )

कुष्माण्डा पूजन

सुबह आरती – 9 :00 //  शाम आरती 8:00

25 सितम्बर- सोमवार  – पँचमी –

( दिन 01:30  तक)

कात्यायनी पूजन।

26 सितंबर मगलवार – महाषष्ठी-

(  दिन 03:20 तक  ,कालरात्रि पूजन ।-

सुबह आरती  दिन 09:00,।शाम आरती 8:00

बेलवरण शाम – 5:50 बजे से

आगमन-  घोडा पर – अशुभ फल

27 सितंबर बुधवार  – महासप्तमी

(शाम  5 :26 तक)

ज्येष्ठा  दिन – 09 :42 तक

नवपत्रिका प्रवेश सुबह – 7 :00 से

सभी प्रतिमा का प्राण प्रतिष्ठा होगी

,आरती *पुष्पाजलि शाम 12 :00 /  शाम आरती 8:00 ।

सांस्कृतिक कार्यक्रम-

28 सितम्बर गुरुवार – महाअष्टमी – 

(रात -07 :26  तक)

महाअष्टमी पूजा  -सन्धिपूजा  बलि – शाम – 7 :26 मे

(मूल- दिन -12:17 तक)

दोपहर –  आरती- पुष्पाँजलि – दोपहर- 11:00   , शाम आरती पुष्पाजलि – 8:00

सांस्कृतिक कार्यक्रम-

29 सितंबर शुक्रवार  – महानवमी- 

 

( रात  -9 :23 तक ,  पूर्षाषाढ दिन 2:47 तक)

सिद्धिदात्री पूजन।

नवमी पूजन , हवन 12:03 बजे दोपहर

आरती *पुष्पाजलि

शाम – 8:00 ।। महाभोग वितरण- दोपहर 2 :00 बजे

साँस्कृतिक कार्यक्रम रात-

30 सितम्बर शनिवार  – विजया दशमी

विजयादशमी -( रात  11:00  तक)

उतराषाढ-  शाम  -05: 0 3 तक )

विसर्जन-हवन – 10:00 से 11:30 तक

पुष्पाजँलि  आरती – सुबह – 11:40

नवरात्रि का पारण । विसर्जन

देवी प्रस्थान – पैदल पाँव – फल  विकल

नवरात्र बिशेष नव देवियो कें नाम उनकें प्रतिदिन कें भोग और तिथियो की पूरी जानकारी, इस नवरात्र में तिथिया बढ़ रही है जो की शास्त्रो कें हिसाब सें शुभ है माता का आना भी शुभ संकेत है। श्रध्दाभाव एवं विश्‍वास सें माँ की सेवा करें आप की हर मनोकामना पूरी होगी।

(1) प्रथम – कलशस्थापन  -शैलपुत्री (भोग -खीर)

(2) द्वितीया- ब्राह्मचारिणी (भोग-खीर,गाय का घी,एवं मिश्री)

(3) त्रतीया-चन्द्रघंटा (भोग-कैला,दूध,माखन,मिश्री )

(4) चतुर्थी-कुष्मांडा (भोग-पोहा,नारियल,मखाना)

(5) पंचमी-स्कन्दमाता (भोग-शहद एवं मालपुआ )खिलोना

(6) षष्टी-कात्यायनी(भोग- शहद एवं खजूर)) सुहाग सामान

(7) सप्तमी-कालरात्री (भोग-अंकुरीत चना एवं अंकुरित मूँग )

(8) अष्टमी-महागौरी (भोग-नारियल,खिचड़ी,खीर )

(9) नवमी -सिध्दीदात्री (भोग-चूड़ा दही,पेड़ा,हलवा,,)

(10 ) दशमी – धान का लावा

Pandit Ramdeo pandey (astrologer Ramdeo pandey ) – Ranchi_ India_ whatsapp 0 8877003232

Continue Reading

India

देश के हाई प्रोफाइल मोस्‍ट वांटेड ढोंगी बाबा, इनके खिलाफ दर्ज हैं कई संगीन मामले

Published

on

देश के हाई प्रोफाइल मोस्‍ट वांटेड ढोंगी बाबा, इनके खिलाफ दर्ज हैं कई संगीन मामले
Prev1 of 11
Use your ← → (arrow) keys to browse

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने 14 नकली बाबाओं की लिस्ट जारी की है। इसमें आसाराम उर्फ आशुमल शिरमानी, सुखविंदर कौर उर्फ राधे मां, सचिदानंद गिरी उर्फ सचिन दत्ता, गुरमीत राम रहीम डेरा सच्चा सिरसा, ओम बाबा उर्फ विवेकानंद झा, निर्मल बाबा उर्फ निर्मलजीत सिंह, इच्छाधारी भीमानंद उर्फ शिवमूर्ति द्विवेदी, स्वामी असीमानंद, ऊं नम: शिवाय बाबा, नारायण साईं, रामपाल, खुशी मुनि, बृहस्पति गिरि और मलकान गिरि समेत कुल 14 नाम शामिल हैं। इनमें से किसी पर मर्डर का आरोप है, तो कोई रेप का दोषी है। लेकिन ये अपने श्रद्धालुओं के बीच काफी प्रसिद्ध रहे हैं। फिर चाहे वो गुरमीत राम रहीम हों या आसाराम।

14 नकली बाबाओं की लिस्ट

आसाराम: आसाराम ने अपने धर्म की दुकान गुजरात के अहमदाबाद से शुरू की। धर्म का सहारा लेकर इन्होंने अरबों का साम्राज्य खड़ा किया है। साल 2013 से ये नाबालिग शिष्या से रेप के आरोप में जेल में बंद हैं।

इनपर आरोप है कि ये आशीर्वाद देने के नाम पर नाबालिग लड़कियों का यौन शोषण और बलात्कार करते थे। हालांकि अब तक इनपर आरोप सिद्ध नहीं हो पाया है।

Prev1 of 11
Use your ← → (arrow) keys to browse

Continue Reading
Advertisement

Polls

Online Shopping में Best Deal किसका ?

View Results

Loading ... Loading ...

Facebook

Advertisement

Trending